ऊँची उड़ान

by | Jan 4, 2022 | Poetry | 0 comments

गरीबी में बीता जिसका बचपन, 

बिन खाये बीती गयी रातें, 

इन सबके बावजूद

ऊंचाइयों को छूना

हमेशा उसके ज़हन में था। 

 

सोचा उसने कि

कुछ करना है मुझे

इस गरीबी से निकलना है मुझे, 

मेहनत करके उड़ना है मुझे, 

ऊंचाइयों को छूना है मुझे, 

हार नहीं माननी है मुझे, 

सपना पूरा करना है मुझे। 

 

सफल हुई उसकी मनोकामना, 

बना वो बादलों का लाडला, 

छूई उसने अपनी मंज़िल, 

भरने लगा उड़ान सपनों की। 

 

मिसाल बना वो उन सबके लिए

जो जिंदगी से हार मान गए थे, 

ऊंचा उड़ना मुश्किल नहीं था, 

ये सिखाया था उसने। 

 

Photo by Svyatoslav Romanov on Unsplash

 

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